श्रीहरिकोटा : इसरो ने शनिवार को अत्यधिक क्षमता वाले संचार उपग्रह जीसेट 29 को उसकी अंतिम भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित किया. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के जीएसएलवी एमके 3-डी2 रॉकेट ने 14 नवंबर को जीसेट-29 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था. अब जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्यों के दुर्गम क्षेत्रों में भी हाई स्पीड इंटरनेट और मोबाइल कम्युनिकेशन की सुविधा देने का रास्ता साफ हो गया है.
चेन्नई से करीब 100 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा से 3423 किलोग्राम के उपग्रह के प्रक्षेपण के तत्काल बाद कर्नाटक के हासन स्थित मास्टर कंट्रोल फेसिलिटी में वैज्ञानिकों ने इसपर नजर रखा.
बता दें कि इससे पहले 14 नवंबर को इसरो ने अपने सबसे च्भारी और शक्तिशालीज् बताए जाने वाले रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3 – डी 2 के जरिए देश के नवीनतम संचार उपग्रह जीसैट- 29 को बुधवार को सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचा दिया. इस प्रक्षेपण को महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान- 2’ अभियान और देश के च्मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशनज् के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है क्योंकि उनमें इसी का उपयोग किया जाएगा.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख के. सिवन ने इस दौरान कहा था कि चंद्रयान के साथ रॉकेट का प्रथम ऑपरेशनल मिशन जनवरी 2019 में होने जा रहा है. वहीं, यह शानदार यान अब से तीन साल में मानव को अंतरिक्ष में ले जाने वाला है. सिवन के मुताबिक इसरो ने अंतरिक्ष में देश के महत्वाकांक्षी मानवयुक्त मिशन को 2021 तक हासिल करने का लक्ष्य रक्षा है, जबकि प्रथम मानव रहित कार्यक्रम ‘गगनयान’ की योजना दिसंबर 2020 के लिए है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह पर अपने संबोधन में यह घोषणा की थी कि भारत गगनयान के जरिए 2022 तक एक अंतरिक्ष यात्री को भेजने की (अंतरिक्ष में) कोशिश करेगा. इस अभियान के सफल होने पर भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला चौथा राष्ट्र बन जाएगा.

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