मुंबई : पिछले एक साल में सभी करंसीज के मुकाबले डॉलर मजबूत हुआ है। रुपया भी इसके असर से अछूता नहीं रहा है। इस दौरान एशियाई इमर्जिंग मार्केट्स में डॉलर के मुकाबले रुपये में सबसे अधिक कमजोरी आई है। ऐसा लगता है कि रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार को मैनेज करने की रणनीति में जो बदलाव किया है, उसका असर भी भारतीय करंसी पर पड़ा है।
अमेरिका में इस साल गर्मियों के बाद से बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में रिजर्व बैंक गोल्ड पर दांव लगा रहा है। उसकी दिलचस्पी डॉलर में कम हुई है। रिजर्व बैंक ने इस साल मार्च से अगस्त के बीच 17 अरब डॉलर के अमेरिकी सरकार के बॉन्ड बेचे हैं। इसके साथ उसने गोल्ड होल्डिंग बढ़ाई है और 6.3 लाख ट्रॉय औंस यानी 19.6 टन गोल्ड खरीदा है। डॉलर में मजबूती के चलते इस दौरान गोल्ड के दाम में गिरावट आई थी, क्योंकि दोनों के बीच उलटा रिश्ता है। इसका इस्तेमाल रिजर्व बैंक ने डायवर्सिफिकेशन के लिए किया।
2018 की पहली छमाही में रिजर्व बैंक के साथ दुनिया के सेंट्रल बैंकों ने 193.3 टन गोल्ड रिजर्व बढ़ाया है, जो साल भर पहले की इसी अवधि की तुलना में 8 पर्सेंट अधिक है। यह जानकारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की हालिया रिपोर्ट से मिली है। इंटरनैशनल मॉनेटरी फंड ने 2018 ग्लोबल फाइनैंशल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में देशों के विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड की बढ़ती अहमियत की तरफ ध्यान दिलाया था। उसने बताया था कि शॉर्ट और लॉन्ग टर्म में सेंट्रल बैंकों के रिजर्व में गोल्ड होल्डिंग बढऩे की उम्मीद है। इंटरनैशनल मॉनेटरी फंड का कहना है कि स्ट्रैटिजिक और टैक्टिकल वजहों से सेंट्रल बैंक गोल्ड की अधिक खरीदारी कर रहे हैं।

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