इस दिवाली दीवारों पर पेंट लगाएं, बीमारी वाला केमिकल नहीं
इस दिवाली दीवारों पर पेंट लगाएं, बीमारी वाला केमिकल नहीं

दिवाली से पहले अगर आप भी अपने घर को #करके चमकाना चाहते हैं, तो सावधानी बरतने की जरूरत है। दीवारों को खूबसूरत बनाने वाला पेंट आपको और आपके बच्चों को बीमार बना रहा है। बच्चों के दिमाग को प्रभावित कर रहा है। टॉक्सिक लिंक की नई स्टडी में कई छोटे और मध्यम ब्रैंड के पेंट में लेड की मात्रा तय सीमा से काफी अधिक मिली है। टॉक्सिक लिंक ने इस स्टडी के लिए 9 शहरों से 32 पेंट सैंपल्स लिए थे। इनमें से 20 सैंपल पेंट रूल 2016 लागू होने के बाद के थे। इन सैंपलों में 8 सैंपल दिल्ली से लिए गए थे। इन पेंट्स में लेड की मात्रा बहुत ज्यादा पायी गई। दरअसल, लेड को पेंट में चमक लाने, उसके टिकाऊपन, लेयर आदि के लिए मिलाया जाता है।
पेंट में लेड के बारे में नहीं है लोगों को जानकारी

टॉक्सिक लिंक के अनुसार, पेंट में लेड के बारे में सिर्फ 16 पर्सेंट लोगों को ही जानकारी है। सिर्फ 32 पर्सेंट रिटेलर को ही इसके बारे में थोड़ी-सी जानकारी है। इतना ही नहीं पेंट ब्रैंड लेबल पर भी गलत जानकारी दे रहे हैं। पेंट रूल 2017 देश भर में नवंबर 2017 से लागू हुआ था, जिसके मुताबिक पेंट में लेड का स्तर 90 पीपीएम से ज्यादा नहीं हो सकता। टॉक्सिक लिंक को 32 पेंट के सैंपल में लेड की मात्रा 15 से 1, 99, 345 पीपीएम तक मिली। पेंट रूल लागू होने के बाद लिए गए 20 सैंपलों में भी 5 ब्रैंड्स में 8 पेंट कैन्स में नो ऐडेड लेड का लेबल लगा था। बावजूद इसके इनमें से 5 में लेड की मात्रा 101 से 41,165 पीपीएम तक मिली। मार्केट में इस समय भी रिटेलर के पास पुराना स्टॉक काफी है, जबकि नवंबर 2018 के बाद इसे बेचा नहीं जा सकता।

नो ऐडेड लेड वाले पेंट में भी लेड की मात्रा 90 पीपीएम से ज्यादा
टॉक्सिक लिंक के प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर डॉ. प्रशांत राजनकर ने अनुसार, हैरानी इस बात की है कि पेंट सैंपल पर नो ऐडेड लेड का लेबल है और उसमें 90 पीपीएम से अधिक लेड मिली है। यह लोगों को गुमराह कर रहा है। स्टडी के लिए लिए गए 12 सैंपल अक्टूबर 2016 से नवंबर 2017 के बीच के हैं। इनमें से सबसे अधिक लेड केरल के सैंपल में मिला जो चेन्नै में बनाया गया था। यह गोल्डन येलो रंग का था।
सभी के लिए खतरनाक है लेड
लेड सभी के लिए खतरनाक है। यह शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है। छोटे बच्चों में लेड डिस्लेक्सिया, एंटी सोशल बिहेवियर, हाइपरटेंशन, परमानेंट न्यूरोलॉजिकल इंजरी की वजह बनता है। गर्भवती महिलाओं पर भी इसका काफी बुरा असर पड़ता है। 1999 में हुए के सर्वे के मुताबिक, अर्बन एरिया में रहने वाले 12 साल तक के 51 पर्सेंट बच्चों के खून में लेड का स्तर 10 माइक्रोग्राम पर डिकीलीटर है। लेड वाले पेंट का असर सालों साल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसे हटाने के बाद भी इसका असर लंबे समय तक बना रहता है।

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