चुनाव आयोग करेगा ऐसी पार्टियों पर कार्यवाही ?
चुनाव आयोग करेगा ऐसी पार्टियों पर कार्यवाही ?

– मनीष शर्मा –

अमृतसर रेल हादसा अब तक सबसे बड़ा हादसा है
जिसमें किसी धार्मिक कार्यक्रम के दौरान ट्रेन से
कटकर मारे गए हों। लेकिन हादसों की जिम्मेदारी
किनकी है और क्या जिम्मेदार विभाग सामने
आएगा? यह हमेशा से प्रश्नवाचक चिन्हों में रहा है।

यदि हम इस पूरी घटना का अवलोकन करें तो इस
हादसे में सबसे ज्यादा जिम्मेदार वह आयोजन
समिति नज़र आती है जिसने ऐसे जगह पर
कार्यक्रम का आयोजन किया बल्कि व्यवस्था के नाम
पर कुछ भी नहीं किया।

आयोजकों ने रेल्वे पटरी पर बैठकर या खड़े होकर लोगों को कार्यक्रम देखने
को मजबूर किया। यदि ऐसा करना ही था तो इसके
लिए रेल्वे से इज़ाजत लेनी थी ताकि रेल्वे प्रशासन
इस हेतु उचित व्यवस्था अपनी ओर से करती।
इतना ही नहीं एक एलईडी स्क्रीन भी इसी हादसे
वाली जगह की ओर लगाई गई थी।

ताकि उस ओर से लोग कार्यक्रम देख सकें इसके अलावा आयोजकों
को साथ बार बार लोगों को सचेत भी किया जाना
चाहिए था कि रेल्व पटरी पर खड़े होकर कार्यक्रम
न देखें बल्कि पटरियों से दूर हटकर कार्यक्रम देखें,
लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वहीं दूसरी बड़ी गलती
यदि कहें तो उस जनता की भी है जो पटरियों पर
खड़े होकर कार्यक्रम देख रहे थे।

ऐसा एक बड़ा रिस्क था यह रिस्क और ज्यादा तब हो जाता है
जब वहां पटाखे भी फूट रहें हों, क्योंकि पटाखों की
आवाज में ट्रेन की आवाज का लुप्त होना निश्चित
है।

ऐसे में सतर्क रहने वाला भी चपेट में आ सकता
है। जहां पर व्यवस्था न हों वहां किसी भी तरह का
कार्यक्रम देखने से हमें परहेज करने की जरूरत है।
ज्यादातर कार्यक्रमों में ऐसी व्यवस्था एक खास वर्ग
के लिए की जाती है बाकी अपने जोखिम पर
कार्यक्रम देखते हैं।

आयोजकों को इस बात की भी जानकारी होती है लेकिन व्यवस्था फिर भी नहीं की
जाती। ऐसे में अव्यवस्था वाले कार्यक्रमों से जनता
को दूर रहना चाहिए। कार्यक्रमों में भीड़ की दरकार
सभी आयोजकों को होती है ऐसे में बगैर व्यवस्था
वाली जगहों पर जाने से परहेज किया जाए तो
आयोजकों को मजबूरन व्यवस्था करनी पड़ सकती
है।

रेल्वे प्रशासन से यदि आयोजकों ने इज़ाजत
नहीं ली है तो वह अपनी रूटीन चेकिंग और धार्मिक
कार्यक्रम के मद्देनजर भीड़ वाली जगह पर ट्रेन धीमी
कर लोगों को ट्रेन के आने की जानकारी देने की
व्यवस्था करती। ऐसे में रेल्वे भी अपनी जिम्मेदारी
से बच नहीं सकती ।

इस घटना के दौरान गुजरने वाली ट्रेन इतनी तेज गति से घटनास्थल से गुजरी
कि चंद सेकंडों में ही कई दर्जन लोग काल के गाल
में समा गए। इसके पहले पड़ने वाले रेल्वे क्रासिंग
पर मौजूद गार्ड भी ट्रेन को इस बात के संकेत दे
सकता था कि ट्रेन धीमी चलाएं और लगातार हार्न
बजाया जाए, क्योंकि यह कार्यक्रम हर वर्ष होता है
इसकी जानकारी इस गार्ड को भी थी।

लेकिन यह लापरवाही भी सामने आयी है। यदि ड्राईवर इस
जगह पर भीड़ देखकर इमरजेंसी ब्रेक लगा देता तब
ट्रेन की गति को देखते हुए ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने
की आशंका थी।

ट्रेन निर्देशों और संकेतों पर चलते
हैं और सही समय में सही निर्देश यदि ड्राईवर को
मिलता तो यह घटना टाल जा सकती थी।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here