– मनीष शर्मा
कांग्रेस पार्टी को सत्ता में लाने के लिए उनके नेता तरह तरह के दांव आजमाने लगे हैं। कांग्रेस इस बात की चिंता नहीं कर रही कि जो दांव वो अजमा रही है वह देश की जनता और देश के लिए कितना घातक है। पिछले कुछ दिनों से गुजरात से यूपी और बिहार के हजारों लोग पलायन कर चुके हैं। इन दोनो ही राज्यों से हजारों लोग रोजगार कर रहे थे या फिर रोजगार की तलाश में गुजरात में रह रहे थे ।
एक घिनौनी वारदात जिसके अपराधी पुलिस की गिरफ्त में हैं, के चलते गुजरात के कांग्रेस नेता और कभी हार्दिक पटेल के साथी रहे अल्पेश ठाकोर ने एक ऐसा बयान दिया जिसमें उन्होंने यूपी और बिहार के लोगों पर कई गंभीर आरोप लगाए, साथ ही उनके समर्थकों ने इन राज्यों के लोगों को गुजरात छोड़ने की चेतावनी देते हुए जगह जगह मारपीट भी की। परिणाम स्वरूप पिछले कुछ ही दिनों के भीतर लोग अपने राज्य लौटने लगे।
कांग्रेस के विधायक अल्पेश ठाकोर ने भाजपा के लिए तीन राज्यों में मुश्किल बढ़ाने का काम किया है लेकिन इसे किसी भी दृष्टि से सही नहीं ठहराया जा सकता। कांग्रेस के इस नेता ने यह जरा भी नहीं सोचा कि इससे क्षेत्रवाद और विभिन्न राज्यों के लोगों के बीच वैमनस्व बढ़ेगा। बावजूद इसके पलायन के दौरान अल्पेश ठाकोर मीडिया के सामने आते हैं और सफाई देते हैं, कि वे इस तरह की राजनीति नहीं करते। साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि यूपी, बिहार के लोगों के पलायन के जिम्मेदार वे नहीं है और न ही उन्होंने कभी ऐसा बयान दिया उनका कहना था कि यदि एक भी ऐसा बयान दिखला दें तो वे राजनीति छोड़ देंगे। लेकिन अब सोशल मीडिया में उनका एक बयान आ गया है जिसमें एक सभा में गुजरात में रहने वाले लोगों के खिलाफ बयान दे रहें हैं। राजनीति में झूठ बोले जाने हजारों उदाहरण देखा गया है उसमें एक और झूठ अब शामिल हो गया है।
कांगेस अपने इस नेता पर क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने की इस करतूत के लिए उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नही की है। वहीं गुजरात पुलिस ने ऐसे भड़काउ बयान देने वाले कुछ लोगों की गिरफ्तारी जरूर की है। अल्पेश ठाकोर की इस करतूत का सीधा निशाना प्रधानमंत्री मोदी हैं अब वाराणसी में मोदी के खिलाफ पोस्टर लग रहें हैं क्योंकि वे गुजराती हैं और गुजरात से आकर वाराणसी से सांसद हैं। ऐसे कई गुजराती हैं जो देश के अन्य राज्यों में अपना व्यवसाय कर रहें हैं ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अल्पेश गुजरात के लोगों के साथ न्याय कर रहें हैं?  यह लग रहा है कि कांग्रेस और उसके नेता इस प्रकरण में अपनी पार्टी के हित की भी नहीं सोच रहें है। मामले को ढांकने की पूरी कोशिश कांग्रेस और भाजपा दोनो तरफ से हो रही है। उधर राहुल गांधी यह बयान दे रहें हैं कि यह पलायन रोजगार को लेकर है जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री का कहना है कि लोग छठ पूजा की वजह से वापस जा रहें हैं। दोनो ही बयानों पर यकीन नहीं किया जा सकता जब सारी चीजे खुलकर सामने है।  जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था खाउंगा न खाने दूंगा। कांग्रेस यहां एक कदम आगे निकल चुकी है अब वह खाना भी बर्बाद करने पर तूली हुई है। मुद्दों पर राजनीति न करते हुए एक ऐसे रास्ते पर चल रही है जो देश की जनता और राज्यों के बीच खाई खोदने का काम कर रही है।
उधर भाजपा की मुश्किलें इस मामले को लेकर बढ़ी हुई है। अगामी दिनों में लोकसभा चुनाव है जो देश भर में होंगे। एसे में गुजरात, यूपी और बिहार के लोगों की नाराजगी वह झेल नहीं सकती। शायद यही वजह है कि उनकी गुजरात सरकार अल्पेश को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है और न ही यूपी बिहार के लोगों का पक्ष ले पा रही है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि इस तरह के क्षेत्रवाद की राजनीति का असर अन्य राज्यों पर नहीं पड़ेगा।

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