नई दिल्ली : डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को तकरीबन स्थिरता के साथ 70.42 पर खुला यानी कारोबार की शुरुआत में एक डॉलर का विनिमय मूल्य 70.42 रुपये रहा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आई तेजी के बाद से रुपये पर दबाव देखा जा रहा है, जिसके कारण दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के कमजोर होने का सपोर्ट रुपये को नहीं मिल रहा है। पिछले सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपया 70.41 पर बंद हुआ। उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार में तेजी का रुझान बना हुआ है।
कमोडिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल आयातकों की ओर से बैंकों की लिवाली के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में रह सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी आने और तेल के दाम में नरमी रहने से दिसंबर में महंगाई दर में कमी आ सकती है। उधर, भारतीय रिजर्व बैंक ने जरूरत पडऩे पर तरलता बढ़ाने की बात कही है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के मसले पर नरम रुख बनाए जाने से डॉलर में फिर कमजोरी आई है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत की माप करने वाला डॉलर इंडेक्स शुक्रवार को फिसलकर एक बार फिर 95 के स्तर नीचे आ गया। डॉलर इंडेक्स में सबसे ज्यादा भारांक वाली मुद्रा यूरो डॉलर के मुकाबले 0.19 फीसदी की मजबूती के साथ 1.15 पर बना हुआ था, जबकि डॉलर इंडेक्स 0.13 फीसदी फिसलकर 94.99 पर आ गया।
पिछले सत्र में डॉलर में मजबूती आने से इंडेक्स 95.20 पर चला गया था और सत्रावसान पर 0.36 फीसदी की मजबूती के साथ 95.13 पर बंद हुआ। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने एक बार मौद्रिक नीतियों में नरम रुख रखते हुए ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने के संकेत दिए हैं। पिछले साल फेड ने चार बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी और दिसंबर की बैठक में कहा था कि 2019 में वह दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा।

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