रायपुर: हॉल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदूषण मुक्त पर्व मनाने के संबंध में विशेषकर दीपावली के अवसर पर 8 से 10 बजे के मध्य रात्रि में पटाखा फोडऩे का आदेश जारी किया गया था साथ ही नियम का उल्लंघन होने पर संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्यवाही का निर्देश भी राज्य सरकारों को दिया गया था। बावजूद इसके राजधानी सहित पूरे प्रदेश में देर रात तक पटाखे फूटते रहे। प्रशासन के जिम्मेदारों द्वारा नियम का उल्लंघन रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। अनेक प्रबुद्धों ने इस आपत्ति व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना होने पर मुख्य सचिव एवं डीजीपी से सख्त कार्यवाही करने के निर्देश संबंधित थाना प्रभारियों देने की मांग की है।
गौरतलब है कि हाई डेसीबल आवाज वाले पटाखों पर भी सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगाया था। सुप्रीम कोर्ट की राय में हाई डेसीबल पटाखों से कानों की बीमारी विशेषकर सुनने में कमी आने के संबंध में उक्त आदेश दिया गया था। दीपावली के दिन हाई डेसीबल पटाखें फूटने से बीमार और वयोवृद्ध नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ज्ञातव्य है कि पूर्व में भी इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना होती रही है। 94 वर्षीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायधीश एल डी देवरस ने सीजेआई रंजन गोगोई से यह जानना चाहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की राज्य सरकार के सामने क्या अहमियत है। कोर्ट के आदेश की खुलेआम अवमानना से यह प्रतीत होता है कि प्रशासनिक अधिकारियों को कोर्ट के आदेश की कोई परवाह नहीं है। ऐसी स्थिति में छोटे-छोटे बच्चों से लेकर मूक प्राणी, पक्षी आदि तेज धमाकों वाले पटाखें जैसे -टाईगर बम, लक्ष्मी बम, रस्सी बम आदि की ध्वनि से बेहद परेशान हुए हैं। देवरस ने सीजेआई से मांग की है कि वर्ष 2019 में दीपावली के अवसर पर अपने आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश तत्काल प्रभाव से राज्य शासन को देने की व्यवस्था करेंगे।

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