नींद के नशे की आदी बन रही है राजधानी दिल्ली

नईदिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के युवा धीरे-धीरे नींद के नशे के आदी होते जा रहे हैं. दिल्ली के हाई-फाई क्लब से निकलकर ये नशा दिल्ली की तंग गलियों तक पहुंच चुका है. युवा ही नहीं नाबालिग बच्चे भी इस नशे के ग्राहक हैं. राजधानी में बैखौफ नशा बेचा जा रहा है.
सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में तंग गालियों के इलाके कहे जाने वाले नंदनगरी से लेकर अलीपुर, बवाना, किराड़ी, कंझावला, बादली, शाहबाद में गांजे के अलावा दवाई के रूप में इस्तेमाल होने वाली नींद की गोलियां, इंजेक्शन आसानी से और सस्ते दाम में मिल जाते हैं.
नशे के कारोबार की शिकायत करने पर कारोबार माफिया हिंसक हो जाते हैं. कुछ दिन पहले तैमूर नगर इलाके में हुई रूपेश की हत्या भी इसी का नतीजा है. 2015 में अलीपुर, रोहिणी इलाके में नशा माफिया ने एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 2013 में एनआरआई अमन सुराना की हत्या में भी नशा माफिया के शामिल होने की बात सामने आई थी.
अगर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा पिछले 6 महीने में जब्त की गई हेरोइन, कोकिन, अफीम, गांजा और अवैध रूप से बिक रहीं नींद की गोलियों, इंजेक्शन के आंकड़ों पर निगाह डालें तो वो भी खासे चौंकाने वाले हैं. सूत्रों की मानें तो दिल्ली में रह रहे कई विदेशी नागरिक नशे के कारोबार को ऑपरेट कर रहे हैं. दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में दर्जनों विदेशी पकड़े भी जा चुके हैं.

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