पुलिस वोट डालने प्रोत्साहित कर रही, नक्सली बहिष्कार का ऐलान
पुलिस वोट डालने प्रोत्साहित कर रही, नक्सली बहिष्कार का ऐलान

जगदलपुर:  बस्तर संभाग के नक्सली प्रभावित इलाके में आसन्न विधान सभा चुनाव को लेकर नक्सली-पुलिस और मतदाताओं के बीच विचारों का जंग छिड़ा हुआ है। एक ओर जहां नक्सली चुनाव बहिष्कार की बात कर रहे हैं । वहीं दूसरी तरफ पुलिस और जिला प्रशासन मतदाताओं के बीच जागरूकता अभियान चला रहे हैं, जिसके चलते अंदरूनी इलाकों में आदिवासियों के बीच वोट डालने की ललक पैदा हो रही है , जो कभी इतनी उम्र के बाद भी अपने मत का प्रयोग नहीं कर पाये।
अधिकारी जानकारी के अनुसार अंदरूनी क्षेत्र के आदिवासियों ने नक्सली चुनाव बहिष्कार के चलते जिला प्रशासन के समक्ष उंगलियों में स्याही नहीं लगाने का सुझाव दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि नक्सलियों ने धमकी दी है कि उंगलियों में वोट डालते के निशान होंगे तो उंगली ही काट दिये जायेंगे। जिला प्रशासन ने उनके सुझाव को गंभीरता से लेते हुये चुनाव आयोग को सिफारिश की है कि नक्सली प्रभावित इलाकों में स्याही के बदले और कोई सुझाव दिया जाये। इस पर चुनाव आयोग ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
एक तरफ नक्सली गांव- गांव जाकर चुनाव बहिष्कार का एलान कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ पुलिस और जिला प्रशासन मतदाताओं को जागरूक कर रहे हैं। नुक्कड़ – नाटक के माध्यम से यहां जागरूकता लायी जा रही हैं। विभिन्न कार्यक्रम कर रंगोली भी बनाये जा रहे हैं । वहीं नक्सली धमकी दे रहें हैं और साथ ही नक्सली भी गीत और नाटक के माध्यम से स्थानीय बोली भाषा में चुनाव बहिष्कार किये जाने की बात कर रहे हैं , लेकिन पिछले दो दशक के बाद इन इलाके के ग्रामीणों में विचार परिवर्तन हुआ है जो एक क्रांतिकारी कदम है। नक्सली प्रभावित इलाके के ग्राम प्रमुख लखमा राम, माड़वी देवा और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में अब पढ़े- लिखे लडक़े हैं। स्कूल है और समझ भी है। इसलिए ग्रामीणों ने इस बार निर्णय लिया है कि बंदुक की दहशत को छोडकऱ बैलेट का सहारा लिया जायेगा, ताकि आने वाली पीढ़ी भी इस इलाके से चुनाव लड़े, गंाव का विकास हो।
गंाव की एक जागरूक महिला रामबती ने बताया कि उन्हें जिला प्रशासन ने अवगत कराया है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक अलग से पिंक बूथ बनाया जा रहा है और इस पिंक बूथ को देखने गांव की महिलाएं पहुंच रही हैं। रामबती ने बताया कि इस पिंक बूथ में स्थानीय बोली भाषा जानने वाली महिलाएं तैनात की जाएंगी। इसके प्रचार – प्रसार से ग्रामीण महिलाओं में वोट डालने का एक नया जूनुन पैदा हुआ है। यह माना जा रहा है कि इस बार महिलाएं भी अधिक से अधिक संख्या में अपने मत का उपयोग करेंगी।

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