भारत को ईरान से तेल आयात पर छूट देने को तैयार अमेरिका
भारत को ईरान से तेल आयात पर छूट देने को तैयार अमेरिका

नई दिल्ली:  अमेरिका ने कच्चे तेल को लेकर ईरान पर लगी पाबंदी से भारत को छूट देने पर सहमति जताई है। अमेरिका का यह कदम भारत द्वारा 2018-19 में तेहरान से तेल के आयात में लगभग एक तिहाई की कटौती के फैसले के बाद आया है। इस बात की आधिकारिक घोषणा अगले कुछ दिनों हो सकती है। एक सूत्र ने यह यह जानकारी दी।
एक नए परमाणु समझौते के लिए ईरान को वार्ता की मेज पर लाने को लेकर अमेरिका ने उसकी आय के सबसे बड़े स्रोत को अवरुद्ध करने के लिए चार नवंबर को उसपर तेल संबंधी पाबंदी दोबारा लगाने की योजना बनाई है। इस पाबंदी के बाद अगर कोई भी देश या कंपनी अमेरिकी अनुमति के बिना ईरान से व्यापार करती है, तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका ने सभी देशों पर ईरान से तेल का आयात शून्य पर लाने का दबाव बनाया है। हालांकि, वह उन कुछ खास देशों को ईरान से तेल के सीमित आयात की मंजूरी देगा, जिन्होंने आयात में भारी कटौती करने का उसे आश्वासन दिया है। भारत तथा अन्य प्रमुख देश तेल आयात से संबंधित छूट पाने के लिए अमेरिका के साथ कई महीनों से बातचीत कर रहे हैं। एक सूत्र ने बताया, भारत तथा अमेरिका के बीच छूट को लेकर व्यापक सहमति है। भारत ईरान से तेल का आयात 2017-18 की तुलना में लगभग 35 फीसदी कम करेगा, जो एक उल्लेखनीय कटौती है।
भारत ने 2017-18 में ईरान से लगभग 2.2 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया था और 2018-19 में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ टन तेल करने की शुरुआती योजना बनाई थी। लेकिन छूट की शर्त पर भारत की तेल कंपनियां आयात घटाकर 1.4-1.5 करोड़ टन करेंगी। सूत्र ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि मार्च 2019 तक ईरान से हर महीने 12.5 लाख टन तेल का आयात किया जाएगा और अक्टूबर तथा नवंबर महीने के लिए कंपनियों ने इतनी ही मात्रा में आयात का ऑर्डर किया था। सरकारी तेल कंपनियों ने हालांकि अभी तक यह तय नहीं किया है कि कौन सी कंपनी कितना तेल का आयात करेगी।
आयात में मिली छूट इंडियन ऑयल तथा एमआरपीएल के लिए बड़ी राहत की खबर है। दोनों ही ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदार हैं। सूत्रों ने बताया कि कंपनियां ईरान को तेल की रकम किस तरह अदा करेंगी, इसपर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि इसके लिए भुगतान के मौजूदा तरीके को ही अपनाया जाएगा, जिसमें 55 फीसदी भुगतान यूरो में और 45 फीसदी भुगतान रुपये में यूको बैंक के जरिये किया जाएगा।
भारत ने छूट पाने के लिए अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि भुगतान का यह तरीका सुनिश्चित करता है कि ईरान भारत की रकम का इस्तेमाल आतंकवाद से संबंधित किसी भी तरह की गतिविधि के लिए नहीं कर सकता है। भारत इसलिए ईरानी तेल को तरजीह देता है, क्योंकि एक तो यह सस्ता पड़ता है, दूसरा यह रिफाइनरी के टेक्निकल कॉन्फिग्यूरेशन के अनुकूल है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here