नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई डांस बार मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि मुंबई में नए सुरक्षा और नियमों के साथ डांस बार दोबारा से खोले जा सकते हैं, लेकिन डांस बार में पैसों की बारिश करने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा अदालत ने कहा है कि इन डांस बार में सी.सी.टी.वी. कैमरों की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि ये लोगों की प्राइवेसी का उल्लंघन करते हैं।
ज्ञात हो कि इस मामले में पिछले साल की 30 अगस्त को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि साल 2005 से सरकार की ओर से एक भी डांस बार को लाइसेंस नहीं दिया गया और जो मौजूदा नियम हैं उसके आधार पर डांस बार पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में कहा था कि समय के साथ अश्लीलता की परिभाषा भी बदल गई है। पुरानी फिल्मों में चुंबन और प्यार भरे दृश्यों के लिए दो फूलों का मिलना और दो पंछियों का चहचहाना दिखाया जाता था, लेकिन अभी के समाज में लिव-इन को भी कुछ हद तक स्वीकार किया जाता है। वहीं महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई डांस बार पर लगाए गए प्रतिबंधों को न्यायसंगत ठहराते हुए कहा था कि ये नियम इन क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए है। हालांकि राज्य सरकार का कहना था कि नया कानून संवैधानिक दायरे में आता है और यह गैर कानूनी गतिविधियों और महिलाओं का शोषण भी रोकता है।
डांस बार मालिकों को किसी भी धार्मिक या शैक्षणिक संस्था से 1 किलोमीटर की दूरी पर डांस बार बनाने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद डांस बार मालिकों की ओर से इस तरह की प्रतिबंध पर आपत्ति जताई गई और मामला कोर्ट में पहुंच गया। उन्होंने दावा किया है कि बड़े शहरों में इन नियमों का पालन करना संभव नहीं है। डांस बार मालिकों ने सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनका लाइसेंस रिन्यूवल भी नहीं किया जा रहा है और न ही नए लाइसेंस दिए जा रहे हैं। उन्होंने ये भी कहना था कि 11.30 बजे से डांस बार को बंद करने का राज्य सरकार का आदेश भी भेदभावपूर्ण है, जबकि केंद्र सरकार ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे चलाए जाने की अनुमति दे रखी है।

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