नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बीते साल पॉक्सो ऐक्ट के तहत दर्ज हुए बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में दो गुना वृद्धि दर्ज की गई। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल 2018 में 30 नवंबर तक ऐसे 165 मामले सामने आए, जबकि 2017 में यह संख्या 88 थी।
पुलिस के मुताबिक 165 में से 140 मामलों में कार्रवाई शुरू कर दी गई है और 144 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं साल 2017 के 88 में से 86 मामलों में 75 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उन पर कार्रवाई की गई है।
जहां 2018 में 80 मामलों में सुनवाई लंबित है, वहीं 82 मामलो में जांच अभी बाकी है। आंकड़ों के अनुसार साल 2017 में, 77 मामलों में सुनवाई का इंतजार रहा, जबकि 35 मामलों में साल के अंत तक जांच जारी थी। इनमें से तीन मामलों में, जांच में कोई परिणाम नहीं निकल सका। 2017 की तरह, पुलिस ने 2018 में 80 लोगों को चालान जारी किए।
दर्ज किए गए मामलों की संख्या में वृद्धि मुख्य रूप से लोगों में जागरूकता बढऩे के कारण है। पिछले साल, विशेष रूप से गरीब तबके से जुड़े लोग आगे आए और बच्चों के खिलाफ अपराधों की सूचना दी। उन्होंने कहा कि 2012 के बाद से मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।
पुलिस के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत मामलों में अपराधी पीडि़तों के जान-पहचान वाले होते हैं, जिससे ऐसे मामलों को रिपोर्ट करना पीडि़त व उनके परिवार के लिए मुश्किल हो जाता है। हालांकि, पुलिस ने दावा किया कि शिकायत किए जाने पर ऐसे अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
पीडि़तों के परिवार के सदस्यों के अलावा, अस्पताल के कर्मचारियों ने भी कार्रवाई करने में पुलिस की मदद की है। उदाहरण के लिए, अस्पताल कर्मियों द्वारा दी गई जानकारी पर कार्रवाई करते हुए, एक 19 वर्षीय को गिरफ्तार किया गया था जब उसकी चचेरी बहन को पिछले साल दिसंबर में नजफगढ़ में प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। काउंसलिंग के दौरान लडक़ी ने कहा कि उसका चचेरा भाई पिछले चार साल से उसके साथ बलात्कार कर रहा था।

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