रायपुर : मोदी सरकार की देशभर में स्वच्छता अभियान और खुले में शौच मुक्ति का कार्यक्रम भी पूरी तरह असफल साबित हुआ है।
उक्त बायान पीसीसी के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कही। श्री शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि माने जाने वाली योजना स्वच्छ भारत की पोल अब खुलने लगी है। कैग ने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजटीय प्रबंधन क्रियान्वयन का ऑडिट किया है जिसमें यह खुलासा हुआ है कि पिछले 5 सालों मे सरकार को 553.22 करोड़ रुपये कमिटमेंट चार्ज के रूप में देने पड़े है।
विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कर्ज देते समय यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि वह राशि समय पर खर्च हो और विकास कार्यो को पूरा किया जा सके। इसी इरादे से वे विदेशी लोन में कमिटमेंट चार्ज का प्रावधान रखती हैं ताकि जो संस्थाएं कर्ज मंजूर करवाकर अगर समय पर उसे ड्रॉ नहीं करेंगी तो उन पर यह चार्ज लगाया जा सके। देश के राज्यों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए वल्र्ड बैंक की ओर कर्ज दिया जाना थाए 2015 की शुरुआत में विश्व बैंक ने महत्वकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान के लिए 1.5 अरब डॉलर के कर्ज को मंजूरी दी थी यह कितना बड़ा लोन था इसे इस तथ्य से आंकिए कि 2015 में सैंक्शन किया गया लोन सोशल सेक्टर में वल्र्ड बैंक की ओर से अभी तक की सबसे बड़ी लेंडिंग थाए लेकिन इस लोन के लिए विभिन्न चरणों में वास्तविक परिणामों की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट सौंपने की शर्त थी।
इसके तहत 14.7 करोड़ डॉलर की पहली किस्त जुलाई 2016 और 22.9 करोड़ डॉलर की दूसरी किस्त जुलाई 2017 में जारी की जानी थी लेकिन मोदी सरकार द्वारा किसी भी एजेंसी से इस योजना की स्वतंत्र रूप में जांच नही कराई गयी। खुले में शौच को कम करने पर स्वतंत्र जांच सर्वेक्षण न हो पाने के कारण भारत को वल्र्ड बैंक से कोई फंड नहीं मिला लेकिन चूँकि लोन भारत सरकार ने मंजूर कराया था इसलिए उसे यह कमिटमेंट चार्ज तो चुकाना ही पड़ा। दुर्भाग्यजनक है कि मोदी सरकार लोन हासिल किए बिना कमिटमेंट फीस चुका रही है। मोदी सरकार आफिशियल तौर पे देश के 96 प्रतिशत गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर चुकी है लेकिन हकीकत इससे अलग है। एक बार किसी अंतराष्ट्रीय एजेंसी से इसकी स्वतंत्र रूप से जाँच कराई जाए तो इस योजना की सारी पोल पट्टी खुल जाएगी और इस योजना में इतना भ्रष्टाचार सामने आएगा पिछले सभी घोटालो का रिकॉर्ड टूट जाएंगे। इसीलिये मोदी सरकार इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने से डर रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here